इंसानियत शर्मसार: 13 साल की नाबालिग से गैंगरेप, पेन लेने निकली थी बच्ची; तीनों आरोपी गिरफ्तार

डेस्क । एक बेहद शर्मनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जिले के रनचिरई थाना क्षेत्र में एक 13 साल की नाबालिग बच्ची के साथ गैंगरेप का मामला प्रकाश में आया है। इस घटना ने एक बार फिर समाज में सुरक्षा व्यवस्था और बच्चियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले में शामिल सभी तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना बालोद जिले के रनचिरई थाना क्षेत्र की है। पीड़िता एक 13 साल की नाबालिग बालिका है, जो अपनी पढ़ाई से जुड़ा पेन लेने के लिए घर से निकली थी। इसी दौरान गांव के ही दो युवक उसे जबरन अपने घर उठा ले गए और वहां उसके साथ घृणित कृत्य को अंजाम दिया।

  • ​घंटों नहीं लौटने पर शुरू हुई तलाश: जब बच्ची काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों को चिंता हुई। उन्होंने गांव में और आसपास उसकी तलाश शुरू की।
  • ​बेहोशी की हालत में मिली बच्ची: परिजनों की घंटों की खोजबीन के बाद रात करीब 11 बजे बच्ची एक युवक के घर में बेहोशी की हालत में मिली।
  • ​अस्पताल में कराया गया इलाज: परिजनों ने बिना देर किए बच्ची को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज कराया गया। उस वक्त सदमे और डर की वजह से बच्ची उस समय पूरी बात खुलकर नहीं बता पाई।

​12 दिन बाद सामने आई खौफनाक सच्चाई

घटना के करीब 12 दिन बीत जाने के बाद जब नाबालिग बच्ची की स्थिति में कुछ सुधार हुआ और उसने हिम्मत जुटाई, तब उसने अपने परिजनों को आपबीती सुनाई। बच्ची ने बताया कि उसके साथ किस तरह सेवानियत को तार-तार किया गया।

​परिजनों को जैसे ही इस खौफनाक वारदात की जानकारी मिली, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत बच्ची को लेकर रनचिरई थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

​पुलिस की त्वरित कार्रवाई: तीनों आरोपी गिरफ्तार

​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत एक्शन लिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गैंगरेप की घटना में शामिल तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ पोक्सो एक्ट (POCSO Act) और भारतीय न्याय संहिता (या प्रासंगिक धाराओं) के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

​सुरक्षा पर बड़ा सवाल: यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे गांवों और घरों के पास भी बच्चियां कितनी असुरक्षित हैं। दिनदहाड़े या सामान्य घरेलू कामों के लिए बाहर निकलने वाली बच्चियों को इस तरह निशाना बनाया जाना बेहद चिंताजनक है।

​इस संवेदनशील मामले में पुलिस आगे की विस्तृत जांच कर रही है ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्य पेश कर आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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