सीबीएसई का नया कदम: अब पैरेंटिंग कैलेंडर के जरिए अभिभावकों की होगी काउंसलिंग, डिप्रेशन और नशे के खतरों से बच्चों को बचाने की पहल

डेस्क । केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अपने पारंपरिक पैरेंटिंग मॉडल में एक बड़ा बदलाव करते हुए एक नया ‘पैरेंटिंग कैलेंडर’ तैयार किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य केवल छात्रों की शैक्षणिक प्रगति तक सीमित न रहकर उनके मानसिक स्वास्थ्य और समग्र विकास को प्राथमिकता देना है। अब स्कूलों में बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों की भी नियमित काउंसलिंग की जाएगी।

​मानसिक स्वास्थ्य और डिप्रेशन पर विशेष ध्यान

आज के दौर में बच्चों में बढ़ते मानसिक तनाव, डिप्रेशन और सेल्फ-हार्म (खुद को नुकसान पहुंचाने) की प्रवृत्तियों को देखते हुए सीबीएसई ने यह महत्वपूर्ण फैसला लिया है। काउंसलिंग सत्रों के माध्यम से अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों, तनाव के शुरुआती संकेतों और मानसिक समस्याओं को समय रहते पहचानने के गुण सिखाए जाएंगे, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

​ड्रग्स के खिलाफ एनसीबी के साथ समझौता

बच्चों को नशे और मादक पदार्थों की गिरफ्त में जाने से बचाने के लिए सीबीएसई ने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के साथ एक खास समझौता किया है। इस साझेदारी के तहत माता-पिता को जागरूक किया जाएगा कि वे अपने बच्चों में नशे के शुरुआती लक्षणों, व्यवहारिक बदलावों और संभावित जोखिमों की पहचान कैसे करें।

​4-आर (4-R) मॉडल पर आधारित रणनीति

पैरेंटिंग कैलेंडर की पूरी रूपरेखा ‘4-आर मॉडल’ के इर्द-गिर्द तैयार की गई है:

  • ​रिलेशनशिप बिल्डिंग (Relationship Building): माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद और भरोसे का मजबूत रिश्ता बनाना।
  • ​रिइन्फोर्समेंट (Reinforcement): बच्चों के सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना और उनका मार्गदर्शन करना।
  • ​रेकग्निशन (Recognition): बच्चों की छोटी-छोटी उपलब्धियों और मानसिक स्थिति की पहचान करना।
  • ​रिस्पॉन्सिवनेस (Responsiveness): बच्चों की समस्याओं और जरूरतों के प्रति संवेदनशीलता दिखाना।

​उम्र के अनुसार अलग-अलग काउंसलिंग सत्र

5 से 15 वर्ष तक की आयु वर्ग के बच्चों की विविध जरूरतों को देखते हुए सीबीएसई ने सत्रों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:

  • ​छोटे बच्चों के लिए: स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने और डिजिटल लत से बचाने के उपाय।
  • ​मध्यम आयु वर्ग के लिए: साइबर बुलिंग, ऑनलाइन सुरक्षा और सुरक्षित सोशल मीडिया उपयोग पर मार्गदर्शन।
  • ​किशोरों के लिए: करियर को लेकर बढ़ने वाले तनाव, परीक्षा के दबाव और सहपाठियों के प्रभाव (Peer Pressure) से निपटने की रणनीतियां।

सीबीएसई का यह संशोधित पैरेंटिंग कैलेंडर घर और स्कूल के बीच के अंतर को कम करने में एक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे बच्चों को एक सुरक्षित, स्वस्थ और तनावमुक्त वातावरण मिल सकेगा।

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