नेताओं की सुरक्षा कटौती पर सियासत: “नक्सलवाद खत्म करने की इच्छा सही, लेकिन सुरक्षा घटाने में जल्दबाजी ठीक नहीं”- बैज

डेस्क । प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था (सिक्योरिटी कवर) में की जा रही समीक्षा और कटौती को लेकर सियासत गर्मा गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार के इस कदम पर अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यद्यपि राज्य से नक्सलवाद का सफाया हर किसी की प्राथमिकता है, लेकिन धरातल की वास्तविक स्थितियों को नजरअंदाज कर नेताओं की सुरक्षा कम करने में सरकार को कतई जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

​”नक्सलवाद पूरी तरह शून्य नहीं हुआ”

​मीडिया से बातचीत करते हुए पीसीसी चीफ दीपक बैज ने नक्सल मोर्चे की मौजूदा स्थिति पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा:

​“हम सब भी यही चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म हो। लेकिन सच यह है कि नक्सलवाद अभी पूरी तरह शून्य (Zero) नहीं हुआ है। सुरक्षा बलों के दबाव के कारण कई दर्जन नक्सली पड़ोसी राज्यों में पलायन कर चुके हैं, मगर खतरा अभी भी टला नहीं है।”

बैज का मानना है कि नक्सलियों की रणनीति समय-समय पर बदलती रहती है। सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई के कारण वे अन्य राज्यों के सीमावर्ती इलाकों में शरण लिए हुए हैं, लेकिन उनका नेटवर्क और उनकी गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।

​सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार को चेतावनी

​हाल के दिनों में शासन द्वारा नेताओं और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा की पुनः समीक्षा (Review) और उसमें कटौती के फैसले पर सवाल उठाते हुए बैज ने कहा कि संवेदनशील और बस्तर जैसे बार्डर इलाकों में जनप्रतिनिधियों की जान को हमेशा जोखिम रहता है।

​उन्होंने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था में अचानक या बिना जमीनी समीक्षा के कटौती करना किसी बड़े खतरे को न्योता देना हो सकता है। सरकार को किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए सतर्कता बरतनी चाहिए और जल्दबाजी में सुरक्षा घटाने के बजाय इंटेलिजेंस और जमीनी इनपुट के आधार पर ही कोई फैसला लेना चाहिए।

​मुख्य बिंदु:

  • ​नक्सली खत्म नहीं, सिर्फ विस्थापित हुए हैं: बैज के अनुसार, सुरक्षा बलों के दबाव से नक्सली भागे जरूर हैं, लेकिन वे पड़ोसी राज्यों की सीमाओं पर सक्रिय रहकर मौका तलाश सकते हैं।
  • ​सुरक्षा में जल्दबाजी खतरनाक: जनप्रतिनिधियों, खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के नेताओं की सुरक्षा घटाना संवेदनशील मामला है।
  • ​साझा लक्ष्य, लेकिन सतर्कता जरूरी: नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में सबका समर्थन है, लेकिन नेताओं की सुरक्षा पर समझौता करना सही रणनीति नहीं है।

​अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के इस बयान के बाद राज्य सरकार और गृह विभाग नेताओं की सुरक्षा समीक्षा नीति पर क्या रुख अपनाते हैं।

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