दरभा (बस्तर)। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक अंतर्गत चितापुर पंचायत का टूटा हुआ पुल स्थानीय ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो रहा है। रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों के लिए लोग इस टूटे पुल को पार कर अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।

जान जोखिम में डालकर सपने गढ़ते नौनिहाल
पुल टूटने के बावजूद बच्चों का हौसला पस्त नहीं हुआ है। डॉक्टर, इंजीनियर और पुलिस बनने का सपना लेकर छात्र रोजाना इस खतरनाक रास्ते से गुजरते हैं। ग्रामीणों ने आवाजाही बनाए रखने के लिए बांस और बल्लियों का एक अस्थायी जुगाड़ पुल तैयार किया है।
- प्रभावित छात्र: चितापुर पंचायत के मोंगराभाठा, धीरागुड़ा और धुरवापारा के लगभग 30 बच्चे चितापुर स्थित मिडिल और हाई स्कूल जाने के लिए हर दिन इस अस्थाई पुल को पार करते हैं।
- छात्रों की व्यथा: बच्चों का कहना है कि लकड़ी के इस ढुलमुल पुल को पार करते समय डर लगता है, लेकिन पढ़ाई जारी रखने के लिए यह जोखिम उठाना पड़ता है।
- उपस्थिति पर असर: स्कूल के प्राचार्य प्रदीप भंडारी ने बताया कि पुल टूटने के कारण छात्रों की उपस्थिति में भारी गिरावट आई है। नाले का जलस्तर बढ़ने पर बच्चों को स्कूल आने से मना किया जाता है, फिर भी पढ़ाई के प्रति लगन के कारण वे जैसे-जैसे पहुँच ही जाते हैं।
2 किलोमीटर की दूरी हुई 8 किलोमीटर, दैनिक जीवन ठप्प
चितापुर क्षेत्र का मुख्य केंद्र है, जहाँ कई महत्वपूर्ण सरकारी और व्यापारिक संस्थान स्थित हैं। पुल न होने से ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है:
प्रभावित सेवा/कार्य
ग्रामीणों पर पड़ रहा असर
आवाजाही/सफर
2 किमी का रास्ता अब 8 किमी के लंबे चक्कर में बदल चुका है।
जरूरी संस्थाएं
जिला सहकारी बैंक, एटीएम, राशन दुकान, चॉइस सेंटर और पंचायत भवन पहुँचना कठिन हो गया है।
अन्य गतिविधियां
साप्ताहिक बाजार और खेती-किसानी के कार्यों के लिए रोज आफत मोल लेनी पड़ती है।
अनोखा जुगाड़
ग्रामीण नाले के एक छोर पर एक मोटरसाइकिल और दूसरे छोर पर दूसरी मोटरसाइकिल खड़ी कर आवाजाही कर रहे हैं।
प्रशासनिक उपेक्षा से ग्रामीणों में रोष
- सरपंच दुर्गावती नाग: “पिछली बरसात में यह पुल टूटा था। मैंने बस्तर कलेक्टर से लेकर स्थानीय विधायक तक पक्का पुल बनाने की गुहार लगाई है, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई।”
- पंचायत सचिव: “पुल टूटने की वजह से क्षेत्र के निरीक्षण (फील्ड वर्क) के लिए 2 किमी की जगह 8 किमी अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है।”
चितापुर का यह टूटा पुल और बांस-बल्ली का जानलेवा जुगाड़ प्रशासनिक उपेक्षा की जीती-जागती तस्वीर पेश करता है। पढ़ाई, राशन, बैंकिंग और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए रोज जिंदगी दांव पर लगाना ग्रामीणों की मजबूरी बन चुका है। बस्तर कलेक्टर और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेकर जल्द से जल्द पक्के पुल का निर्माण शुरू कराना चाहिए, ताकि मासूम बच्चों की शिक्षा सुरक्षित हो सके और ग्रामीणों को राहत मिल सके।

