डेस्क । मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक मामला सामने आया है, जहाँ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक रामनिवास शाह की निजी लग्जरी कार (टोयोटा इनोवा) को सरकारी फायर ब्रिगेड की गाड़ी से धोने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस घटना के बाद वीआईपी कल्चर और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

क्या है पूरा मामला?
सिंगरौली विधानसभा सीट (क्रमांक 80) से बीजेपी विधायक रामनिवास शाह का शासकीय आवास बिलौंजी इलाके में स्थित है। वायरल वीडियो के अनुसार, विधायक निवास के बाहर नगर निगम की एक फायर ब्रिगेड (दमकल) गाड़ी खड़ी थी। इस गाड़ी से जुड़े हाई-प्रेशर पाइप का इस्तेमाल कर कम से कम तीन कर्मचारी विधायक की इनोवा कार पर पानी डालकर उसकी सफाई करते दिखे। स्थानीय लोगों ने इस पूरी घटना को अपने कैमरों में रिकॉर्ड कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
विपक्ष और जनता का विरोध
वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया यूज़र्स और विपक्षी दलों ने सरकार और विधायक पर तीखा हमला बोला।
- कांग्रेस का हमला: विपक्ष ने इसे वीआईपी घमंड और जनता के टैक्स के पैसों का दुरुपयोग करार दिया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जो आपातकालीन वाहन और पानी लोगों की जान व संपत्ति बचाने के लिए रखे जाते हैं, उन्हें नेताओं की गाड़ियाँ चमकाने में लगाया जा रहा है।
- प्रशासनिक प्रतिक्रिया: सिंगरौली नगर निगम की कमिश्नर सविता प्रधान ने इस संबंध में बयान दिया कि उन्हें शुरुआत में इस मामले की जानकारी नहीं थी।
विधायक और कर्मचारियों का पक्ष
विवाद बढ़ता देख विधायक रामनिवास शाह ने मामले पर अपनी सफाई दी:
- विधायक का बयान: उन्होंने कहा कि कोई भी विधायक खुद अपनी गाड़ी नहीं धोता। घटना के समय वे विभिन्न सरकारी व सामाजिक कार्यक्रमों (साइकिल वितरण और बैठक आदि) में व्यस्त थे।
- ड्राइवर की भूमिका: विधायक के मुताबिक, जब उन्होंने अपने ड्राइवर से पूछा, तो उसने बताया कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी पास में ही मेयर या अध्यक्ष के घर पानी भरने आई थी। संयोग से इनोवा कार वहीं खड़ी थी, तो ड्राइवर ने थोड़ा पानी मारने के लिए कह दिया।
- डांटने की बात: विधायक ने दावा किया कि उन्होंने अपने ड्राइवर को इस बात के लिए सख्त हिदायत और डांट दी है कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही या काम न दोहराया जाए।
हालांकि विधायक ने इसे ड्राइवर की अनजानी भूल बताकर मामला शांत करने की कोशिश की है, लेकिन फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवा के इस इस्तेमाल ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।