
बिलासपुर । बिलासपुर में स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस का विरोध अब घर-घर पहुंच गया है। कांग्रेस नेता और पार्षद अलग-अलग वार्डों में पहुंचकर लोगों से स्मार्ट मीटर और बिजली बिल की जानकारी जुटा रहे हैं। इसके लिए उपभोक्ताओं से फॉर्म भरवाया जा रहा है। पुराने और नए बिजली बिल की तुलना कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली खर्च में कितना बदलाव आया है।बिलासपुर में स्मार्ट मीटर को लेकर कांग्रेस ने घर-घर सर्वे शुरू किया है। कांग्रेस नेता और पार्षद वार्डों में पहुंचकर उपभोक्ताओं से सीधे जानकारी ले रहे हैं।सर्वे में लोगों से स्मार्ट मीटर लगने से पहले और बाद के बिजली बिल की जानकारी ली जा रही है। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली के खर्च में कितना अंतर आया है।
कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल में बढ़ोतरी हुई है। पार्टी का कहना है कि इसी दावे की वास्तविकता जानने के लिए वार्ड स्तर पर यह सर्वे किया जा रहा है।कांग्रेस ने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं होने की बात कही जाती है, लेकिन नए बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाए जा रहे हैं।कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सर्वे पूरा होने के बाद इसके आंकड़े सरकार के सामने रखे जाएंगे। वहीं महतारी वंदन योजना को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि एक तरफ महिलाओं को एक हजार रुपये दिए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ स्मार्ट मीटर के जरिए ज्यादा बिजली बिल वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।फिलहाल कांग्रेस के इस घर-घर सर्वे ने स्मार्ट मीटर के मुद्दे को एक बार फिर गरमा दिया है। हालांकि बिजली बिल बढ़ने के कांग्रेस के दावों की वास्तविकता सर्वे और आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही साफ होगी।