मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ का बड़ा खुलासा
डेस्क । स्वास्थ्य क्षेत्र में लापरवाही और फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की विशेष जांच टीम ने श्री महावीर अस्पताल में छापेमारी कर आईसीयू (ICU) प्रभारी के रूप में कार्यरत डॉ. नुरुल आलम की मेडिकल डिग्रियों की पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि डॉ. आलम की MBBS की डिग्री केवल ‘संदिग्ध’ नहीं, बल्कि पूरी तरह से फर्जी (Fake) है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि बिना किसी वैध योग्यता और मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रेशन के, यह कथित डॉक्टर पिछले दो सालों से अस्पताल के आईसीयू (गंभीर देखभाल इकाई) में मरीजों का इलाज कर रहा था। critical care में भर्ती अत्यंत गंभीर मरीजों का जीवन ऐसे व्यक्ति के हाथों में सौंपा जाना अस्पताल प्रबंधन की सुरक्षा और सत्यापन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

लैब टेक्नीशियन के पास भी दस्तावेज नदारद
स्वास्थ्य विभाग की जांच केवल डॉक्टर तक ही सीमित नहीं रही। अस्पताल की पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक व्यवस्था की जांच करने पर लैब टेक्नीशियन सुमन राजवाड़े भी कटघरे में आ गए।
- जांच के मुख्य बिंदु:
- लैब टेक्नीशियन सुमन राजवाड़े के पास पद के अनुसार आवश्यक शैक्षणिक व तकनीकी योग्यता के दस्तावेज नहीं मिले।
- जांच टीम के अनुसार, बिना प्रमाणित योग्यताओं के मरीजों की रिपोर्ट तैयार की जा रही थी, जिससे गलत इलाज और गलत जांच का खतरा बना हुआ था।
स्वास्थ्य विभाग का कड़ा रुख: FIR दर्ज कराने के निर्देश
मामले का खुलासा होते ही स्वास्थ्य प्रशासन हरकत में आ गया है। विभाग ने अस्पताल प्रबंधन और संबंधित फर्जी स्टाफ के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है:
स्वास्थ्य टीम के कड़े निर्देश:
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस फर्जीवाड़े पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मामले में तुरंत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही अस्पताल के लाइसेंस, रजिस्ट्रेशन और कर्मचारियों के वेरिफिकेशन की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।
अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल
इस घटना के बाद शहर के चिकित्सा गलियारों में हड़कंप मच गया है। आम जनता और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मन में कई तीखे सवाल उठ रहे हैं:
- वेरिफिकेशन में चूक क्यों? पिछले दो वर्षों से बिना वैध कागजात के एक व्यक्ति ICU जैसे संवेदनशील विभाग में कैसे काम कर रहा था?
- मरीजों की सुरक्षा का क्या? क्या अस्पताल प्रशासन ने भर्ती के समय मेडिकल काउंसिल से डिग्रियों का सत्यापन कराया था?
- लाइसेंस रद्द होगा? क्या ऐसे निजी अस्पतालों के खिलाफ केवल FIR काफी है या उनके संचालन पर भी स्थायी रोक लगनी चाहिए?
स्वास्थ्य विभाग ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जिले के अन्य सभी निजी अस्पतालों की डिग्रियों की भी जांच अभियान चलाकर की जाएगी।
मुख्यांश:
- जांच टीम ने ICU में तैनात डॉ. नुरुल आलम की मेडिकल डिग्री को फर्जी करार दिया।
- आरोपी कथित डॉक्टर पिछले दो वर्षों से अस्पताल में निर्बाध रूप से अपनी सेवाएं दे रहा था।
- जांच के दौरान लैब टेक्नीशियन सुमन राजवाड़े के पास भी अनिवार्य शैक्षणिक व तकनीकी दस्तावेज अनुपलब्ध मिले।
- स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित लोगों पर तत्काल FIR दर्ज करने के सख्त निर्देश दिए हैं।