राष्ट्रपति का ऐतिहासिक संबोधन, कहा—”मुरिया दरबार की व्यवस्था लोकतंत्र को सशक्त बनाती है”

जगदलपुर (छत्तीसगढ़): विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व के पावन अवसर पर राष्ट्रपति महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने बस्तर पहुँचकर माँ दंतेश्वरी देवी के दर्शन किए और समस्त देशवासियों को दशहरा पर्व की बधाई दी। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा, जनजातीय समाज की एकजुटता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके समर्पण की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राज्य के राज्यपाल और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।

​1. बस्तर की अनूठी परंपराएं और मुरिया दरबार का लोकतांत्रिक महत्व

राष्ट्रपति मुर्मू ने बस्तर दशहरा उत्सव के दौरान आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक स्टॉलों और परंपराओं का अवलोकन किया। उन्होंने बस्तर के विभिन्न समाजों और जनजातीय समुदायों द्वारा सामूहिक रूप से इस 75-दिवसीय ऐतिहासिक पर्व को मनाने की भावना की सराहना की।

  • ​मुरिया दरबार और जमीनी लोकतंत्र: राष्ट्रपति ने बताया कि माँझियों (जनजातीय प्रमुखों) ने उन्हें ‘मुरिया दरबार’ की व्यवस्था के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि यह परंपरा पूरी तरह जमीन से जुड़ी हुई है और समाज में खुशहाली व समरसता का मार्ग प्रशस्त करती है। यह व्यवस्था भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को और अधिक मजबूत बनाती है।
  • ​समावेशी संस्कृति: उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा में विभिन्न वर्गों और समाजों की आत्मीय भागीदारी साधारण नहीं, बल्कि एक अद्वितीय उदाहरण है, जिससे सभी को सीखने की आवश्यकता है।

2. दंडकारण्य की पौराणिक महत्ता और आस्था

​अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने बस्तर के पौराणिक और धार्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा:

  • ​वाल्मीकि रामायण में उल्लेख: बस्तर अंचल ऐतिहासिक दंडकारण्य क्षेत्र का हिस्सा है, जिसका वर्णन वाल्मीकि रामायण में मिलता है।
  • ​श्रीराम का चरण-स्पर्श: यह वही पवित्र भूमि है जहाँ भगवान श्री राम ने अपने बनवास काल का समय बिताया था। यहाँ की जनजातियों ने प्रभु राम का आतिथ्य किया था।
  • ​पौराणिक घटनाएं: माता सीता का अपहरण, रावण का वध और माता शबरी से प्रभु राम का मिलन—ये सभी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक घटनाएं इसी दंडकारण्य क्षेत्र से जुड़ी हैं। राष्ट्रपति ने सभी से इस पवित्र भूमि की मर्यादा और पवित्रता को बनाए रखने का आह्वान किया।

3. नक्सलवाद से मुक्ति, शांति और विकास का नया सवेरा

​राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ और बस्तर लंबे समय तक नक्सल आतंक की पीड़ा झेलते रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से अब नक्सलवाद का प्रभाव तेजी से समाप्त हो रहा है, जिससे लोग भयमुक्त होकर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहे हैं।

  • ​बस्तर ओलंपिक और खेल प्रतिभाएं: सुदूर अंचलों में शांति स्थापित होने से युवाओं को नई ऊर्जा मिली है। बस्तर ओलंपिक में जनजातीय युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया है। राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यहाँ के प्रतिभाशाली खिलाड़ी आने वाले समय में ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक लाएंगे।
  • ​पर्यावरण संरक्षण का संदेश: राष्ट्रपति ने जनजातीय समाज द्वारा पेड़, पौधे, मिट्टी और पत्थरों की पूजा करने की परंपरा की सराहना की। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे ही हमारे जीवनदाता हैं और प्रकृति तथा जंगलों को बचाना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने बंजर और खाली जमीनों पर पौधारोपण करने का सामूहिक संकल्प लेने का अनुरोध किया।

​4. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का संबोधन: बस्तर में विकास और शांति की नई लहर

​बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति और राज्यपाल का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस वर्ष के उत्सव को विशेष बताया।

​मुख्यमंत्री द्वारा रेखांकित मुख्य बिंदु:

  1. ​दोहरी खुशी का अवसर: मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष बस्तर दशहरा दो कारणों से अत्यंत खास है—पहला, महामहिम राष्ट्रपति का ऐतिहासिक आगमन और दूसरा, बस्तर का माओवाद के साए से मुक्त होना।
  2. ​सांस्कृतिक वैश्विक पहचान: ‘बस्तर पंडुम’ के माध्यम से बस्तर की समृद्ध संस्कृति देश और विदेश तक पहुँच रही है।
  3. ​सड़क और रेल कनेक्टिविटी:
    • ​’नियद नेल्लानार’ योजना और बुनियादी ढांचे के विकास के तहत सुदूर क्षेत्रों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है, जहाँ मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा संचालित हो रही है।
    • ​रायपुर-रावघाट रेल लाइन शुरू हो चुकी है तथा रावघाट से जगदलपुर रेल लाइन का कार्य तीव्र गति से जारी है।
  4. ​शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांति:
    • ​ओरछा और जगरगुंडा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी का निर्माण किया जा रहा है।
    • ​जगदलपुर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और गीदम में मेडिकल कॉलेज का निर्माण कर स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया गया है।
  5. ​जनजातीय कल्याण: वनोपज का उचित मूल्य प्रदान कर आदिवासियों और वनवासियों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा रहा है।

​निष्कर्ष

​कुटुम्ब जात्रा के बाद 27 अक्टूबर को मावली देवी की डोली विदाई के साथ बस्तर दशहरा के अनुष्ठानों का समापन होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस दौरे और राज्य सरकार की विकास योजनाओं ने बस्तर को न केवल सांस्कृतिक रूप से एकजुट किया है, बल्कि शांति, सुरक्षा और समृद्धि के एक नए युग का शुभारंभ भी किया है।

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