डेस्क । 1 नवंबर का दिन भारतीय प्रशासनिक और भौगोलिक इतिहास में अत्यंत स्वर्णिम और महत्वपूर्ण है। इसी दिन वर्ष 2000 में भारत के 26वें राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ का गठन हुआ था। मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से को पुनर्गठित कर बनाए गए इस राज्य ने अपनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा, लोक-संस्कृति और जनजातीय विरासत के साथ देश के मानचित्र पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई।

छत्तीसगढ़ राज्य गठन के इतिहास, संघर्ष, भौगोलिक महत्व और विकास यात्रा पर एक विस्तृत लेख:
1. गठन की पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संघर्ष
छत्तीसगढ़ को पृथक राज्य बनाने की मांग कोई अचानक उठाया गया कदम नहीं था, बल्कि यह दशकों लंबे शांतिपूर्ण जन-आंदोलन और संघर्षों का परिणाम था।
- प्रारंभिक विचार (1924): पृथक छत्तीसगढ़ राज्य की पहली स्पष्ट मांग वर्ष 1924 में रायपुर जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक में उठी थी।
- स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की भूमिका: पंडित सुंदरलाल शर्मा (जिन्हें छत्तीसगढ़ का गांधी भी कहा जाता है), डॉ. खूबचंद बघेल, और बैरिस्टर छेदीलाल जैसे दूरदर्शी नेताओं ने छत्तीसगढ़ी भाषा, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान को बचाने के लिए अलग राज्य का सपना देखा था। 1956 में डॉ. खूबचंद बघेल की अध्यक्षता में ‘छत्तीसगढ़ भातृ संघ’ का गठन हुआ।
- राजनैतिक प्रयास: 1990 के दशक में राज्य गठन की मांग ने तीव्र गति पकड़ी। शंकर गुहा नियोगी और जन-प्रतिनिधियों द्वारा जन-आंदोलन चलाए गए।
- विधेयक की प्रक्रिया (2000):
- 25 जुलाई 2000 को लोकसभा में ‘मध्य प्रदेश पुनर्गठन विधेयक 2000’ पेश किया गया।
- 31 जुलाई 2000 को यह लोकसभा से और 9 अगस्त 2000 को राज्यसभा से पारित हुआ।
- 25 अगस्त 2000 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. के.आर. नारायणन ने इस विधेयक पर अपनी सहमति दी।
- अंततः 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश के 16 जिलों को अलग कर एक नया राज्य ‘छत्तीसगढ़’ अस्तित्व में आया।
आया।
2. भौगोलिक एवं सामाजिक स्वरूप
- नामकरण: ऐसा माना जाता है कि शिवनाथ नदी के उत्तर में 18 और दक्षिण में 18, यानी कुल 36 गढ़ (किले) होने के कारण इस क्षेत्र का नाम ‘छत्तीसगढ़’ पड़ा।
- संसाधनों का भंडार: छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” (Rice Bowl of India) कहा जाता है। इसके अलावा, यह राज्य कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, और टीन जैसे खनिजों से समृद्ध है। भारत में टीन अयस्क का उत्पादन करने वाला यह एकमात्र राज्य है।
- हरित राज्य और जनजातीय संस्कृति: राज्य का लगभग 44% हिस्सा वनों से आच्छादित है। यहाँ की गोंड, बैगा, उरांव और मारिया जैसी समृद्ध जनजातीय परंपराएँ, बस्तर का दशहरा और कर्मा-सुआ नृत्य यहाँ की अनूठी संस्कृति का आधार हैं।
3. राज्योत्सव का आयोजन और महत्व
हर साल 1 नवंबर से पूरा प्रदेश उत्सव के माहौल में डूब जाता है, जिसे ‘राज्योत्सव’ के रूप में मनाया जाता है।
- सांस्कृतिक और विकास प्रदर्शनी: राजधानी रायपुर (नवा रायपुर) सहित सभी जिला मुख्यालयों में बहु-दिवसीय भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विकास प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता है।
- राज्योत्सव सम्मान: इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों (जैसे- साहित्य, कला, समाज सेवा, कृषि, खेल और पत्रकारिता) में उत्कृष्ट योगदान देने वाली हस्तियों को राज्य सरकार द्वारा सर्वोच्च ‘छत्तीसगढ़ राज्योत्सव सम्मान’ से नवाजा जाता है।
4. गठन से अब तक: विकास की उपलब्धियां
गठन के बाद से छत्तीसगढ़ ने विकास के हर क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है:
- ऊर्जा और उद्योग: भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के साथ-साथ आज छत्तीसगढ़ देश का प्रमुख पावर हब (Power Hub) बन चुका है।
- बुनियादी ढांचा: नवा रायपुर (अटल नगर) को देश के पहले नियोजित ग्रीनफील्ड स्मार्ट शहरों में से एक के रूप में विकसित किया गया है।
- कृषि एवं ग्रामीण विकास: धान खरीदी की बेहतर व्यवस्था, राजीव गांधी किसान न्याय योजना जैसी नीतियों और समर्थन मूल्य पर रिकॉर्ड फसल खरीदी से राज्य के किसान आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं।
- जनजातीय कल्याण: वनोपज (जैसे महुआ, तेन्दूपत्ता) के संकलन और प्रसंस्करण के माध्यम से वनवासियों की आय और जीवन स्तर में सुधार लाया गया है।
निष्कर्ष
1 नवंबर का दिन केवल एक प्रशासनिक पुनर्गठन की तारीख नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की जनता के स्वाभिमान, संस्कृति और आत्मनिर्भरता के सपने का साकार होना है। शांति, सद्भाव और प्राकृतिक संपदा से परिपूर्ण छत्तीसगढ़ “जय जोहार, जय छत्तीसगढ़” के मूल मंत्र के साथ देश के अग्रणी राज्यों में अपनी जगह बना रहा है।

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