जगदलपुर । बस्तर संभाग पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और नदियों के जलस्तर में हुई बेतहाशा वृद्धि से भारी तबाही झेल रहा है। चक्रवाती तंत्र के प्रभाव से हुई भारी बारिश के बाद इंद्रावती, शबरी और मुनगाबहार जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान के काफी ऊपर बह रही थीं, जिससे क्षेत्र का सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।


हालाँकि बीते 24 से 48 घंटों में बारिश की तीव्रता में कमी आई है, लेकिन 29 सितंबर को एक नई चुनौती सामने आ गई है। ओडिशा के नबरंगपुर डैम से इंद्रावती नदी में करीब 162 करोड़ लीटर (1.62 अरब लीटर) पानी छोड़े जाने के कारण तटीय इलाकों और निचले इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
29 सितंबर की स्थिति: नबरंगपुर डैम से छूटा पानी, फिर बढ़ा खतरा
ओडिशा की ओर से नबरंगपुर डैम से लगातार बहाए जा रहे पानी (लगभग 250 क्यूमेक/सेकंड) के कारण बस्तर में इंद्रावती नदी का जलस्तर फिर से चढ़ने की आशंका है। मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन के अनुसार, छोड़ा गया यह पानी मंगलवार देर रात तक बस्तर के सीमावर्ती इलाकों तक पहुँच सकता है।
इस स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने इंद्रावती नदी के आसपास के इलाकों और निचले गांवों में रेड अलर्ट जारी कर दिया है। लोगों को नदी के किनारों से दूर रहने और सुरक्षित स्थानों पर टिके रहने की हिदायत दी गई है।
अब तक के हालात और जनजीवन पर असर
पिछले हफ्ते हुई भारी तबाही के कारण बस्तर सहित पूरे राज्य में व्यापक नुकसान दर्ज किया गया है:
- रेस्क्यू और राहत कार्य: वायुसेना (IAF) के हेलीकॉप्टरों और SDRF की टीमों की मदद से जगदलपुर के पास डोंगा घाट और अन्य जलमग्न इलाकों में फंसे दर्जनों लोगों को एयरलिफ्ट कर सुरक्षित निकाला गया है।
- संपर्क टूटा: नेशनल हाईवे 30 (NH-30) और कई आंतरिक संपर्क सड़कों के जलमग्न होने से बस्तर का ओडिशा और आंध्र प्रदेश से संपर्क बाधित रहा। कई अंदरूनी आदिवासी इलाकों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट चुका है।
- राहत शिविर और विस्थापन: जगदलपुर के चिवनी, भाटी और लालबाग जैसे डूब प्रभावित इलाकों से सैकड़ों परिवारों को निकालकर राहत शिविरों (जैसे शासकीय भगत सिंह स्कूल) में शिफ्ट किया गया है, जहाँ उन्हें भोजन और चिकित्सा सुविधाएँ दी जा रही हैं।
- रेल व हवाई सेवाएं प्रभावित: जलभराव और खराब मौसम के चलते जगदलपुर क्षेत्र में कई उड़ानें और ट्रेनें रद्द या डाइवर्ट करनी पड़ी हैं।
सरकार और प्रशासन की तैयारी
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। उन्होंने बाढ़ से हुई क्षति का त्वरित सर्वेक्षण करने और पात्र प्रभावित परिवारों को तुरंत आर्थिक व खाद्यान्न सहायता पहुँचाने के सख्त निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।
प्रशासनिक टीम, एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) के साथ मिलकर तटवर्ती इलाकों में मुस्तैद है। हालांकि मानसून तंत्र उत्तर-पूर्व की ओर खिसक रहा है, लेकिन बांधों से छोड़े जा रहे पानी और नदियों के उफान को देखते हुए अगले 24 से 48 घंटे बस्तर के लिए बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं।