जगदलपुर । छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और प्राकृतिक वैभव से परिपूर्ण बस्तर संभाग का मुख्यालय जगदलपुर इस बार अपनी अनूठी दुर्गा पूजा को लेकर सुर्खियों में है। यहाँ के संतोषी वार्ड में नवयुवक दुर्गा समिति द्वारा तैयार किया गया ‘कांतरा’ (Kantara) थीम पर आधारित दुर्गा पंडाल इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर शहर भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। बांस कला (बैम्बू आर्ट) के बेजोड़ इस्तेमाल और इस शानदार कलाकारी को देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।

मुख्य आकर्षण और खास बातें
- बांस कला का अनूठा प्रयोग: इस पंडाल की सबसे बड़ी खासियत इसका मुख्य हिस्सा है, जिसे पूरी तरह से और बड़े पैमाने पर बांस के जरिए तैयार किया गया है। जगदलपुर के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी पंडाल के निर्माण में इतने वृहद स्तर पर बांस का इस्तेमाल किया गया है।
- कोलकाता के कलाकारों की मेहनत: इस भव्य रचना को साकार करने के लिए कोलकाता से विशेष कलाकारों को बुलाया गया था। इन कुशल कारीगरों ने लगभग 24 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद इस नायाब पंडाल का निर्माण किया है।
- लागत और भव्यता: इस पूरे पंडाल और आकर्षक लाइटिंग (प्रकाश व्यवस्था) के निर्माण पर लगभग तीन से साढ़े चार लाख रुपये की लागत आई है, जो इसकी भव्यता में चार चाँद लगा रही है।
प्रेरणा और 28 साल की परंपरा
संतोषी वार्ड के लोग पिछले 28 सालों से लगातार माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं, जो उनकी अटूट आस्था को दर्शाता है।
इस बार कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ समिति के सदस्यों ने दुर्ग और रायपुर जिलों का दौरा किया था। वहाँ उन्होंने ‘कांतरा’ फिल्म के सेट की शैली पर बने पंडालों को लोगों को आकर्षित करते और जमकर वाहवाही बटोरते देखा। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने जगदलपुर वासियों को भी एक नया और रोमांचक अनुभव देने का निर्णय लिया और संतोषी वार्ड में इस कांतरा स्टाइल पंडाल को जीवंत कर दिया।
संस्कृति और कला का अद्भुत संगम
बस्तर अपनी पारंपरिक कला और हस्तशिल्प के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, और यहाँ बांस (बांस शिल्प) का विशेष महत्व है। ऐसे में ‘कांतरा’ जैसी लोकप्रिय लोक-संस्कृति पर आधारित फिल्म की थीम को बांस के जरिए उकेरना बस्तर की स्थानीय कला के साथ एक बेहतरीन तालमेल बिठाता है।
यही वजह है कि इस पंडाल में विराजमान माँ दुर्गा के दर्शन के लिए न केवल स्थानीय लोग बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और अन्य जिलों से भी भारी संख्या में भक्तगण पहुँच रहे हैं। यह पंडाल इस वर्ष जगदलपुर की दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
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