डेस्क । अस्पताल की मदर-चाइल्ड यूनिट में प्रसव के दौरान कथित लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। ग्राम अंडा निवासी एक परिवार ने आरोप लगाया है कि डिलीवरी के वक्त बरती गई लापरवाही के कारण 3.8 किलोग्राम वजन के नवजात के दाहिने हाथ की हड्डी टूट गई। जन्म के बाद बिगड़ी स्थिति के चलते मासूम को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह पिछले करीब 10 दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। परिजनों के अनुसार बच्चे की स्थिति ‘ब्रेन डेड’ जैसी बनी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना 2 अक्टूबर की सुबह की है। पीड़ित पिता डालेश्वर कुमार तारक के मुताबिक, उनकी पत्नी को दूसरे बच्चे के प्रसव के लिए 1 अक्टूबर की रात जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2 अक्टूबर तड़के सामान्य प्रसव के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ द्वारा कथित तौर पर लापरवाही बरती गई।

पिता का आरोप है कि प्रसव के दौरान बच्चा काफी देर तक फंसा रहा, जिससे उसकी सांसें उखड़ने लगीं और उसे गंभीर आंतरिक चोटें आईं। परिजनों का कहना है कि जब स्थिति बिगड़ने लगी, तो अस्पताल में वेंटिलेटर सुविधायुक्त बेड उपलब्ध न होने की बात कहकर बच्चे को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। इसके बाद घबराए परिजन तुरंत नवजात को एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उसका इलाज जारी है। इस घटना के बाद से मां और पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
पीड़ित परिवार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, दुर्ग एसपी विजय अग्रवाल और कलेक्टर अभिजीत सिंह को लिखित शिकायत भेजी है। परिवार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषी स्वास्थ्यकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। मामले में सोमवार को जिला अस्पताल पहुंचकर अधिकारियों ने परिजनों के बयान भी दर्ज किए हैं।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
मामले के तूल पकड़ने के बाद दुर्ग जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. आशीष मिंज ने मीडिया से बातचीत में बताया कि शिकायत मिलते ही तत्काल प्रभाव से दो सदस्यीय जांच टीम का गठन कर दिया गया है। डॉ. मल्होत्रा और डॉ. उज्ज्वल इस पूरे प्रकरण की जांच कर रहे हैं, और शाम तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है।
सिविल सर्जन ने स्वीकार किया कि एक्स-रे रिपोर्ट में नवजात के दाहिने हाथ की हड्डी टूटी हुई दिखाई दे रही है। हालांकि, उन्होंने अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी और मरीजों के अत्यधिक दबाव का हवाला भी दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही किस स्तर पर और किसकी ओर से हुई है, इसकी असल तस्वीर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी।