डेस्क । छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से एक बार फिर सकारात्मक और राहत भरी खबर सामने आई है। पुलिस और सुरक्षा बलों के लगातार प्रयासों तथा पुनर्वास नीतियों के प्रभावस्वरूप, छह खूंखार माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। ये सभी माओवादी पड़ोसी राज्य ओडिशा के गजपति जिले में सक्रिय रहकर संगठन के लिए काम कर रहे थे।
आत्मसमर्पण करने वालों का विवरण
- स्थानीय निवासी: आत्मसमर्पण करने वाले छह नक्सलियों में से पांच बीजापुर जिले के और एक नारायणपुर जिले का निवासी है।
- फरार अपराधी: इनमें से दो माओवादी ऐसे हैं जो लंबे समय से बीजापुर जिले में विभिन्न आपराधिक मामलों में फरार चल रहे थे।
- सक्रिय क्षेत्र: ये सभी लंबे समय से ओडिशा के गजपति जिले के जंगलों और इलाकों में संगठन की गतिविधियों को संचालित करने में शामिल थे।
हिंसा के रास्ते से मोहभंग और पुनर्वास की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा बलों की बढ़ती दबिश, अंदरूनी इलाकों में नए कैंपों की स्थापना और छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल उन्मूलन व पुनर्वास नीति के कारण माओवादियों का मोहभंग तेजी से हो रहा है। संगठन के भीतर हो रहे वैचारिक मतभेद, बाहरी राज्यों में कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताने और स्थानीय स्तर पर मिल रहे अपनेपन के माहौल ने इन युवाओं को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया है।
प्रशासन की ओर से आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तुरंत सहायता राशि, रोजगार के अवसर और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि वे समाज में एक सम्मानित और सुरक्षित जीवन व्यतीत कर सकें।
शांति की ओर बढ़ता बीजापुर
बीजापुर और आसपास के बस्तर संभाग में पिछले कुछ समय में बड़ी संख्या में माओवादियों ने हथियार डाले हैं। प्रशासन की यह पहल न केवल सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी सफलता है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि विकास, विश्वास और सुरक्षा का त्रय सूत्र अब अंदरूनी इलाकों में सकारात्मक बदलाव लाने लगा है।

इस घटना से क्षेत्र के अन्य भटके हुए युवाओं को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर शांति और विकास के मार्ग पर लौटने की प्रेरणा मिलेगी।