डेस्क । बस्तर की पहचान अब केवल उसकी प्राकृतिक खूबसूरती और सांस्कृतिक धरोहर तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह क्षेत्र अब पुनर्वास, स्वावलंबन और सामाजिक बदलाव के नए आयाम गढ़ रहा है। जगदलपुर स्थित ‘कैफे पण्डुम’ इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटे युवाओं द्वारा संचालित यह कैफे आज उम्मीद, सम्मानजनक जीवन और आर्थिक सशक्तीकरण का प्रतीक बन चुका है।

हाल ही में जगदलपुर में आयोजित राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन के दौरान भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष भूटानी के नेतृत्व में केंद्र और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने कैफे पण्डुम का भ्रमण किया।
सराहना, उत्साह और आत्मीयता का संगम
भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने कैफे के शांत वातावरण, सादगी, प्राकृतिक रंगों से सजी जीवंत सजावट और स्थानीय व्यंजनों के स्वाद की दिल खोलकर तारीफ की।

- आजीविका और पुनर्वास की नई दिशा: बस्तर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने प्रतिनिधिमंडल को कैफे की मूल अवधारणा और इससे जुड़े परिवारों के आर्थिक संवर्धन के प्रयासों से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह पहल हिंसा से प्रभावित लोगों और मुख्यधारा में लौटे युवाओं को न केवल आर्थिक संबल दे रही है, बल्कि उन्हें समाज में एक गरिमापूर्ण पहचान भी दिला रही है।
- उत्साहवर्धन और संवाद: राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों ने कैफे का संचालन कर रहे युवाओं से सीधा संवाद किया, उनके अनुभवों को सुना और उनके इस कदम की मुक्तकंठ से सराहना की।
- सकारात्मक प्रभाव: इतने बड़े स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और उनकी सकारात्मक प्रतिक्रिया से कैफे का संचालन कर रहे युवाओं में जबरदस्त उत्साह और नया आत्मविश्वास देखने को मिला।
बदलते बस्तर की तस्वीर
‘पण्डुम’ शब्द स्थानीय संस्कृति में उत्सव और सामूहिक खुशी का प्रतीक है। कैफे पण्डुम उसी भावना को जीवंत करते हुए उन युवाओं के जीवन में रोशनी ला रहा है, जो कभी भटक गए थे। यह पहल यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, सामाजिक सहयोग और प्रशासनिक इच्छाशक्ति से किसी भी क्षेत्र की तस्वीर बदली जा सकती है। कैफे पण्डुम आज बस्तर में शांति, सामाजिक समरसता और आर्थिक स्वावलंबन का एक सफल सामाजिक नवाचार बनकर देश के सामने मिसाल पेश कर रहा है।
