जगदलपुर । विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी भव्यता, अनोखी परंपराओं और सदियों पुराने विधानों के लिए पूरी दुनिया में अपनी एक विशेष पहचान रखता है। करीब 75 दिनों तक चलने वाला यह दुनिया का सबसे लंबा दशहरा पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जन-जन की अगाध आस्था का जीवंत दस्तावेज है। इस महापर्व के दौरान होने वाले हर एक विधान का अपना ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है।
फूल रथ की परिक्रमा: परंपरा और श्रद्धा का संगम
बस्तर दशहरा के इन पावन दिनों में एक और अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक रस्म की शुरुआत हो चुकी है—फूल रथ की परिक्रमा।
- मां दंतेश्वरी का आशीर्वाद: सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार, नवरात्रि के तीसरे दिन और जोगी बिठाई के दूसरे दिन विशाल फूल रथ पर बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी का छत्र पूरे विधि-विधान के साथ विराजमान किया जाता है।
- रथ परिक्रमा का विधान: छत्र के विराजमान होते ही रथ परिक्रमा का यह सिलसिला शुरू हो जाता है, जो परंपरा के अनुसार भीतर रैनी तक अनवरत जारी रहता है।
- श्रद्धालुओं का जनसैलाब: इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने और रथ को खींचने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु जगदलपुर पहुंचते हैं। इस दौरान पूरा शहर मां दंतेश्वरी के जयकारों और पारंपरिक गीतों से गूंज उठता है।
बस्तर सांसद महेश कश्यप ने इस परंपरा को बस्तर की अगाध आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बताते हुए कहा कि पूर्वजों से चली आ रही इस महान परंपरा का निर्वहन आज भी पूरी निष्ठा के साथ किया जा रहा है। उन्होंने मां दंतेश्वरी और मावली माता से दशहरा पर्व के निर्विघ्न संपन्न होने की प्रार्थना की है और देश-दुनिया के लोगों से इस अनूठे आयोजन में शामिल होने का आह्वान किया है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के आगमन से बढ़ा बस्तर का गौरव
इस वर्ष का बस्तर दशहरा बस्तरवासियों के लिए ऐतिहासिक और बेहद खास होने जा रहा है। इसका मुख्य कारण देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बस्तर दशहरा के सबसे महत्वपूर्ण विधान—मुड़िया दरबार—में शामिल होना है।
- गर्व का विषय: राष्ट्रपति के बस्तर आगमन को लेकर पूरे अंचल में जबरदस्त उत्साह और उमंग का माहौल है। बस्तरवासियों के लिए यह न केवल गर्व का विषय है, बल्कि उनकी संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाला एक बड़ा सम्मान भी है।
- भव्य स्वागत की तैयारियां: स्थानीय प्रशासन और बस्तरवासी महामहिम के ऐतिहासिक स्वागत और अभिनंदन के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। राष्ट्रपति की उपस्थिति इस लोक-उत्सव के गौरव को कई गुना बढ़ा देगी।
सामूहिक सहभागिता और जन-उत्सव की रौनक
बस्तर दशहरा बस्तर के आदिवासियों की सामूहिक सहभागिता, सामाजिक समरसता और प्रकृति के प्रति उनके प्रेम का अनूठा उदाहरण है। फूल रथ की परिक्रमा शुरू होने के साथ ही जगदलपुर की गलियों और मेलों की रौनक देखने लायक होती है। यहाँ की हर एक रस्म, हर एक वाद्य यंत्र और लोक नृत्य यह बयां करता है कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी बस्तर के लोगों ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को कितनी मजबूती से संजोकर रखा है।
”बस्तर दशहरा सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा की धड़कन है, जो हर साल हमारी प्राचीन संस्कृति को पुनर्जीवित कर देती है।”
यह महाकुंभ न केवल बस्तर के इतिहास का गवाह है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विविधता का एक ऐसा अनमोल मोती है, जो हर भारतीय को गौरवान्वित करता है।