तुफार का कब तक रहेगा बस्तर समेत पूरे छत्तीसगढ़ में असर… पढिये तूफान की सारी जानकारी

डेस्क । बंगाल की खाड़ी में बने गहरे अवदाब (Deep Depression) / चक्रवाती तंत्र के कारण छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में मौसम में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय इलाकों से टकराने के बाद इस मौसमी तंत्र का सीधा असर छत्तीसगढ़ के दक्षिण और मध्य भागों पर सबसे अधिक पड़ रहा है।

​️ छत्तीसगढ़ में तूफान का असर कब तक रहेगा?

​मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, इस मौसमी तंत्र का प्रभाव छत्तीसगढ़ में अगले 2 से 3 दिनों तक बना रहेगा।

  • ​प्रारंभिक चरण: चक्रवात/अवदाब का असर राज्य में शुरू हो चुका है, जिससे बस्तर संभाग और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो रही है।
  • ​मुख्य असर की अवधि: दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ (रायपुर, दुर्ग, बस्तर संभाग) में भारी बारिश और तेज हवाओं की सबसे अधिक सक्रियता देखने को मिलेगी।
  • ​राहत की संभावना: जैसे-जैसे यह मौसमी तंत्र आगे बढ़कर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure) में बदलेगा, इसका असर धीरे-धीरे कम होगा। राज्य में मौसम धीरे-धीरे सामान्य स्थिति की ओर लौटने लगेगा।

​️ राज्य में कहाँ और कैसा दिखेगा प्रभाव?

​1. अत्यधिक प्रभावित क्षेत्र (बस्तर संभाग)

​दक्षिण छत्तीसगढ़ के जिले जैसे—सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, नारायणपुर और कांकेर इस तंत्र के सीधे प्रभाव क्षेत्र में हैं।

  • ​इन क्षेत्रों में तेज गर्जना के साथ मध्यम से भारी बारिश और कुछ स्थानों पर अति-भारी वर्षा की आशंका है।
  • ​हवा की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।

​2. मध्यम प्रभावित क्षेत्र (मध्य छत्तीसगढ़)

​रायपुर, दुर्ग, धमतरी, महासमुंद, गरियाबंद, कबीरधाम और बिलासपुर संभाग के जिलों में बादल छाए रहेंगे।

  • ​रुक-रुक कर हल्की से मध्यम वर्षा और कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है।

​3. आंशिक प्रभावित क्षेत्र (उत्तर छत्तीसगढ़)

​सरगुजा संभाग (अंबिकापुर, कोरिया, जशपुर आदि) में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे और कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है।

​⚠️ संभावित खतरे और मुख्य प्रभाव

  1. ​अस्थाई जलभराव: दक्षिण छत्तीसगढ़ के निचले इलाकों, नदी-नालों और शहरी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
  2. ​तेज हवाएं व वज्रपात: आंधी और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने (वज्रपात) का जोखिम बना रहेगा।
  1. ​फसलों को नुकसान: धान की तैयार हो रही फसलों या कटाई के दौर में खड़ी फसलों को तेज पानी और हवा से नुकसान हो सकता है।
  1. ​तापमान में गिरावट: बारिश और बादलों के कारण दिन का अधिकतम तापमान 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है।

​️ सुरक्षा एवं सावधानी के निर्देश

  • ​खुले स्थानों से बचें: मौसम खराब होने और बिजली चमकने के दौरान पेड़ों के नीचे, ट्रांसफार्मर या कच्चे ढांचों के पास शरण न लें।
  • ​किसानों के लिए सलाह: खेतों में पानी निकासी का उचित प्रबंध करें और कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर ढककर रखें।
  • ​सफर में सावधानी: नदी-नालों के उफान पर होने की स्थिति में रपटों/पुलियों को पार करने का जोखिम न उठाएं।
  • ​आधिकारिक अपडेट्स: मौसम विभाग (IMD) और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों पर नज़र रखें।
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