डेस्क। विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है। इस पर्व की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ रावण दहन के बजाय मां दंतेश्वरी और देवी शक्तियों की आराधना की जाती है। दशहरा पर्व और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों के दौरान ‘टेंपल कमेटी’ की ओर से देवी की पूजा के लिए बहुमूल्य सोने-चांदी के आभूषण और छत्र (श्रृंगार सामग्री) सौंपे जाते हैं, जिन्हें कार्यक्रम समाप्त होते ही वापस जमा कर लिया जाता है। बीते कई दशकों से यह परंपरा इसी तरह पारदर्शी रूप से चली आ रही है। लेकिन इस वर्ष सामने आई तस्वीरों ने श्रद्धालुओं और प्रशासन को स्तब्ध कर दिया है।
सोने के छत्र से गायब हो रही हैं लटकन पट्टियां
मां दंतेश्वरी के लिए इस्तेमाल होने वाले शुद्ध सोने के छत्रों की वर्तमान स्थिति चौंकाने वाली है। मुख्य छत्र के चारों ओर लगी सोने की लटकनें, बालियां और पट्टियां धीरे-धीरे गायब हो रही हैं।
- 3 प्रमुख छत्र प्रभावित: मंदिर के तीनों मुख्य छत्रों में से अधिकांश से सोने की कीमती पत्तियां और लटकनें गायब पाई गई हैं।
- कीमत का आकलन: गायब हुई एक-एक पट्टी की बाजार में औसतन कीमत ₹50,000 से ₹1,00,000 तक आंकी जा रही है।
चोरी या भीड़ का फायदा?
पर्व के दौरान उमड़ने वाली अपार जनमेदिनी के कारण शुरुआती तौर पर यह स्पष्ट कह पाना मुश्किल था कि यह आभूषण भीड़ में टूटकर गिर रहे हैं या इनके पीछे कोई सोची-समझी साजिश है। हालांकि, मंदिर के पुजारियों का नजरिया अलग है।
मंदिर के पुजारी की आशंका: पुजारियों का कहना है कि पूजा सामग्री को लाने-ले जाने और सौंपने के दौरान कोई अज्ञात व्यक्ति जानबूझकर धीरे-धीरे इन पत्तियों को पार कर रहा है। यह महज भीड़ में टूटने की घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा में सेंध का मामला लग रहा है।
प्रबंधन और टेंपल कमेटी की लापरवाही उजागर
आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले ने टेंपल कमेटी और दशहरा समिति के रखरखाव प्रबंधन की पोल खोलकर रख दी है। इतने कीमती और ऐतिहासिक आभूषणों की नियमित जांच, गिनती और सुरक्षा में लगातार ढिलाई बरती गई। अगर समय रहते सुरक्षात्मक उपाय किए जाते या हर आयोजन के बाद आभूषणों का भौतिक सत्यापन होता, तो इस तरह की गड़बड़ी को काफी पहले रोका जा सकता था।


फिलहाल, केवल मंदिर के पुजारियों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मांग की है कि:
- गायब हुए सोने के हिस्सों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- लाने-ले जाने और सुरक्षा की पूरी प्रक्रिया को सीसीटीवी व सख्त निगरानी के दायरे में लाया जाए।
- समय रहते इस तरह की संभावित चोरी पर अंकुश लगाया जाए ताकि देवी के श्रृंगार और जन-आस्था की पवित्रता बनी रहे।