डेस्क । जिला चिकित्सालय में इलाज में कथित लापरवाही के कारण एक गर्भवती महिला और उसके नवजात शिशु की मौत का गंभीर मामला सामने आया है। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों ने जिला अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर समय पर उचित इलाज न देने का आरोप लगाते हुए जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) से लिखित शिकायत की है। पीड़ित परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
जालबांधा निवासी मुकेश सिन्हा की 27 वर्षीय पत्नी मयूरी सिन्हा को प्रसव (डिलिवरी) के लिए 31 अगस्त को राजनंदगांव जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार, सुबह 11:00 बजे मयूरी को अस्पताल में दाखिल कराया गया था और उस वक्त उसकी स्थिति सामान्य थी।
- 1 सितंबर की दोपहर: मयूरी खुद चलकर सोनोग्राफी और अन्य आवश्यक चिकित्सीय जांच कराने गई थी।
- दोपहर 2:00 बजे: अचानक मयूरी की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद स्टाफ नर्स ने परिजनों को बताया कि महिला का इमरजेंसी ऑपरेशन करना पड़ेगा।
- शाम 5:00 बजे: मयूरी की बिगड़ती हालत को देखते हुए उसे ऑपरेशन थिएटर (OT) ले जाया गया।
- शाम 6:00 बजे: सिविल सर्जन ने परिजनों को सूचना दी कि डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद मां और बच्चे दोनों को नहीं बचाया जा सका।
पोस्टमार्टम न कराने और जल्दबाजी का आरोप
परिजनों का गंभीर आरोप है कि मौतों के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। परिजनों के मुताबिक, सिविल सर्जन ने उनसे यह कहते हुए कागजात पर दस्तखत करवा लिए कि “पोस्टमार्टम (Post-Mortem) कराने की कोई आवश्यकता नहीं है।” इसके बाद रात में ही अस्पताल के वाहन से शव को उनके गृह ग्राम जालबांधा भेज दिया गया।
पीड़ित परिवार का कहना है कि:
- जब महिला खुद चलकर जांच कराने गई थी और स्थिति सामान्य प्रसव (Normal Delivery) जैसी लग रही थी, तो अचानक ऐसी कौन सी स्थिति बनी जिससे दोनों की जान चली गई?
- दोपहर 2 बजे स्थिति बिगड़ने के बाद भी ऑपरेशन थिएटर ले जाने में शाम 5 बजे तक का वक्त क्यों लगा? उपचार में हुई इस कथित देरी का कारण स्पष्ट होना चाहिए।
- परिजनों ने मांग की है कि भर्ती से लेकर मृत्यु तक के पूरे मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टरों की भूमिका और अपनाई गई प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच की जाए।
अस्पताल प्रशासन की सफाई: अटैक और जटिलता से हुई मौत
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन डॉ. महेंद्र प्रसाद ने अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों पर लगे लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष:
- कार्डियक अटैक: सिविल सर्जन का कहना है कि महिला की मौत इलाज में लापरवाही से नहीं, बल्कि प्रसव के दौरान आए अचानक अटैक (हार्ट अटैक/कार्डियक अरेस्ट) के कारण हुई है।
- बच्चे की स्थिति: सोनोग्राफी रिपोर्ट के बाद यह पाया गया था कि गर्भ में बच्चे की स्थिति उल्टी (Breech presentation) थी।
- गर्भ में ठंडा पानी जाना: जांच में यह बात भी सामने आई कि गर्भ के भीतर एम्नियोटिक फ्लूइड (ठंडा पानी/मेकोनियम) चला गया था, जिसके बाद मयूरी को तीव्र प्रसव पीड़ा शुरू हुई थी।
अस्पताल के अनुसार, स्थिति जटिल होने के कारण तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया गया था, लेकिन मरीज को बचाया नहीं जा सका।

निष्पक्ष जांच की मांग
जच्चा-बच्चा की दर्दनाक मौत के बाद जालबांधा क्षेत्र और पीड़िता के परिवार में भारी शोक और आक्रोश का माहौल है। परिजनों ने जिला प्रशासन और पुलिस से गुहार लगाई है कि अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी चार्ट और मेडिकल फाइलों की गहन जांच की जाए ताकि यह साफ हो सके कि यह चिकित्सीय जटिलता थी या फिर समय पर इलाज न मिलने का नतीजा।
