जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध ‘बस्तर दशहरा’ केवल आस्था और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक ही नहीं, बल्कि संपूर्ण बस्तर अंचल की अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। हर साल 75 दिनों तक चलने वाले इस ऐतिहासिक पर्व और यहां की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की झलक पाने के लिए देश-विदेश से हजारों पर्यटक जगदलपुर पहुंचते हैं। हालांकि, इस वर्ष रेल सुविधाओं में आई बाधाओं और मेगा ब्लॉक के कारण बस्तर के पर्यटन कारोबार पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
लैंडस्लाइड और मेगा ब्लॉक बना रुकावट
मालिगुड़ा के पास हुए भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और रेल मार्ग पर जारी मेगा ब्लॉक के कारण रेलवे यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और ओडिशा की ओर से जगदलपुर आने वाली प्रमुख ट्रेनें कोरापुट तक ही चलाई जा रही हैं। ट्रेनों के कोरापुट में ही समाप्त हो जाने के कारण दूर-दराज से आने वाले यात्रियों व पर्यटकों को जगदलपुर पहुंचने में अत्यधिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

होटल और स्थानीय व्यापार को आर्थिक झटका
दशहरा सीजन के दौरान जगदलपुर के होटल, ट्रैवल एजेंसियां और छोटे व्यवसायी बेहतर व्यापार की उम्मीद लगाते हैं। लेकिन रेल सेवा बाधित होने के बाद से स्थिति चिंताजनक हो गई है।
- बुकिंग में गिरावट: होटलों और होम-स्टे में एडवांस बुकिंग तेजी से रद्द (कैंसल) हो रही हैं।
- स्थानीय रोजगार पर असर: पर्यटकों की संख्या घटने से टैक्सी व वाहन चालक, टूर गाइड, हस्तशिल्प (आर्टिसन) और स्थानीय छोटे दुकानदारों की आजीविका पर सीधा असर पड़ा है।
होटल एसोसिएशन के सचिव साहिल बारोटिया ने लगातार रद्द होती बुकिंग्स पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो पूरे पर्यटन उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
परमिट-फ्री बसों का सुझाव: क्या है समाधान?
पर्यटकों की सुविधा और स्थानीय व्यवसाय को बचाने के लिए होटल एसोसिएशन ने प्रशासन से त्वरित वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था की मांग की है।
साहिल बारोटिया ने सुझाव दिया कि:
“जब तक रेल सेवा पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, तब तक कोरापुट से जगदलपुर के बीच विशेष ‘परमिट-फ्री’ बसें चलाई जानी चाहिए, ताकि कोरापुट में रुकने वाले पर्यटक बिना किसी अतिरिक्त परेशानी के आसानी से बस्तर पहुंच सकें।”
सवाल: कब जागेगा प्रशासन?
बस्तर दशहरा का मुख्य पर्व अब अपने चरम पर है, ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पर्यटकों की सुगम आवाजाही के लिए वैकल्पिक इंतजाम कब किए जाएंगे? यदि समय रहते जिला प्रशासन और परिवहन विभाग द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसका दूरगामी असर बस्तर के पर्यटन, बाजार और स्थानीय नागरिकों की आजीविका पर देखने को मिलेगा।
स्थानीय कारोबारियों की मांग है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शासन-प्रशासन को तत्काल प्रभाव से अंतर्राज्यीय बस सेवाओं और विशेष रूट परमिट पर निर्णय लेना चाहिए।