डेस्क । शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। शासकीय प्राथमिक शाला तेलियापुरान (भरारी) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें नन्हे मासूम बच्चे हाथों में भारी बाल्टियां उठाकर पानी ढोते नजर आ रहे हैं।

स्कूल में फैली अव्यवस्था की खुली पोल
सामने आई जानकारी के अनुसार, बच्चों से यह श्रम किसी खेल या गतिविधि का हिस्सा नहीं, बल्कि टॉयलेट का इस्तेमाल करने के लिए कराया जा रहा है। स्कूल में पानी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मासूम बच्चों से बाल्टियों में पानी भरवाया जा रहा है। वायरल वीडियो में छोटे-छोटे बच्चे भारी बाल्टी संभालने में जद्दोजहद करते दिख रहे हैं।
जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल
सरकार जहां एक ओर “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में वे स्कूल परिसर में बुनियादी सुविधाओं की कमी का खामियाजा भुगत रहे हैं।
इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। लोग सीधे तौर पर स्कूल प्रशासन और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल उठा रहे हैं:
- क्या शासकीय स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराना बच्चों की जिम्मेदारी है?
- जब टॉयलेट जैसी मूलभूत आवश्यकता के लिए बच्चों से मजदूरी कराई जाएगी, तो वे पढ़ाई पर ध्यान कैसे केंद्रित करेंगे?
- इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार शिक्षकों और अधिकारियों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई?
यह घटना सिर्फ तेलियापुरान भरारी स्कूल की लापरवाही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की स्कूली व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। देखना होगा कि वीडियो वायरल होने और मामला तूल पकड़ने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग दोषियों पर क्या सख्त कदम उठाता है।