इंदौर के अर्बन हाट में 10 से 13 सितंबर तक आयोजित राष्ट्रीय ‘भारत उदय मध्य प्रदेश एक्सपो 2026’ में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले की ग्रामीण महिला उद्यमियों ने अपनी हस्तशिल्प कला और जैविक उत्पादों की छाप छोड़ी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों ने सीधे राष्ट्रीय स्तर के उपभोक्ताओं और व्यापारियों तक पहुंच बनाई।

प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण एवं भागीदारी
प्रदर्शनी में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का स्टॉल भारत माता स्व-सहायता समूह (चिलकुटी), तूरेनार ग्रोथ सेंटर और कलागुड़ी के साझा सहयोग से लगाया गया था।
- बेलमेटल (ढोकरा) कला: बस्तर की प्रसिद्ध धातु शिल्प कलाकृतियों की नक्काशी ने कलाप्रेमियों और आगंतुकों का ध्यान खींचा।
- प्राकृतिक वनोपज: बस्तर के जंगलों से तैयार शुद्ध तीखुर और इमली की बिक्री हुई।
- ‘छत्तीसकला’ ब्रांड उत्पाद: समूह द्वारा तैयार हल्दी, धनिया, लाल मिर्च पाउडर, सुगंधित जीराफूल चावल और शुद्ध सरसों तेल की स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने खरीदारी की।
- नवाचार से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
‘नवाचार से आत्मनिर्भरता तक – विकसित भारत, समृद्ध मध्य प्रदेश’ की थीम पर आयोजित इस एक्सपो का मुख्य उद्देश्य बिचौलियों को हटाकर ग्रामीण कारीगरों को सीधे बाजार से जोड़ना था।
प्रमुख लाभ
विवरण
सीधा संवाद
महिलाओं को थोक व्यापारियों और ग्राहकों से सीधी बात करने का अवसर मिला।
आर्थिक मजबूती
चार दिवसीय आयोजन में उत्पादों की बिक्री से समूह को वित्तीय लाभ हुआ।
व्यावहारिक अनुभव
शहरी बाजार के अनुसार ब्रांडिंग, पैकेजिंग और उपभोक्ता मांग को समझने में मदद मिली।


इस आयोजन ने साबित किया कि सही दिशा और मंच मिलने पर बस्तर के सुदूर क्षेत्रों की महिलाएं अपनी पारंपरिक कला के दम पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।