डेस्क । छत्तीसगढ़ का बस्तर अंचल एक ऐतिहासिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। 8 और 9 अक्टूबर को जगदलपुर (बस्तर) में पहली बार दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन का भव्य आयोजन किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ‘सहकार से समृद्धि’ की सोच को धरातल पर उतारने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से यह राष्ट्रीय मंच सजकर तैयार है।
देशभर के शीर्ष अधिकारी और विशेषज्ञ होंगे शामिल
भारत सरकार के सहकारिता सचिव की अध्यक्षता में आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन में देश की सहकारिता नीति को नई दिशा देने वाले शीर्ष नीति-नियंता हिस्सा ले रहे हैं।
- 15 राज्यों के सहकारिता सचिव एवं 14 राज्यों के पंजीयक (Registrar) इस राष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
- देश के विभिन्न हिस्सों से आए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, नीति-निर्माता और सहकारिता विशेषज्ञ ग्रामीण विकास के इस मॉडल पर गहन विचार-विमर्श करेंगे।
किन प्रमुख मुद्दों पर होगा मंथन?
सम्मेलन के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि और डिजिटल क्रांति को जोड़ने वाले कई अहम विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी:
- एम-पैक्स (M-PACS) और डिजिटल सहकारिता: प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को बहुउद्देशीय (Multipurpose) बनाने और सहकारिता क्षेत्र में पारदर्शिता लाने के लिए पूर्ण डिजिटलीकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- सहकारी बैंकिंग व्यवस्था: किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों तक आसान एवं सुलभ वित्तीय सहायता पहुँचाने के लिए सहकारी बैंकों के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा होगी।
- भंडारण क्षमता का विस्तार: ग्रामीण स्तर पर खाद्यान्न भंडारण की आधुनिक व्यवस्था विकसित करने और पैक्स के माध्यम से गोदामों के निर्माण पर कार्ययोजना बनेगी।
- ‘सहकार से समृद्धि’ रोडमैप: देश के अंतिम व्यक्ति तक सहकारिता के लाभ पहुँचाने के लिए भविष्य की नई नीतियों पर सहमति बनाई जाएगी।
छत्तीसगढ़ साझा करेगा अपनी उपलब्धियां
इस राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ राज्य अपनी सहकारिता मॉडल और उपलब्धियों को देश के सामने मजबूती से रखेगा। प्रदेश में सहकारिता के दायरे को बढ़ाते हुए हाल ही में 515 नए एम-पैक्स (M-PACS) का गठन किया गया है, जो राज्य में ग्रामीण स्वरोजगार और किसानों की आय बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।
बस्तर के विकास को मिलेगी नई रफ्तार
पारंपरिक रूप से प्राकृतिक संपदा से समृद्ध बस्तर में इस तरह के राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलन का आयोजन यह दर्शाता है कि अब अंचल विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सहकारिता आधारित योजनाओं, जैसे- स्व-सहायता समूहों, लघु वनोपज प्रसंस्करण और कृषि-उत्पादन मार्केटिंग से बस्तर के जनजातीय और ग्रामीण समाज को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
8 और 9 अक्टूबर का यह राष्ट्रीय सहकारिता सम्मेलन न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में सहकारिता आंदोलन को एक नई ऊर्जा और आधुनिक दृष्टि प्रदान करेगा।
